मेरी लिखी बातों को हर कोई समझ नही सकता,क्योंकि मैं अहसास लिखती हूँ,और लोग अल्फ़ाज पढ़ते हैं..! अनुश्री__________________________________________A6
Monday, October 30, 2017
Friday, October 6, 2017
इंटर में सेकेंड डिवीजन, दिल्ली गये, एक कमरे में तैयारी की और साथ बने IAS
प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के दौरान सावन की दोस्ती मधेपुरा के आदित्य कुमार के साथ हुई। आदित्य का रिजल्ट भी औसत ही था। उनके पिता छोटे किसान थे और बुनकरी का काम बी करते थे। वे भी रेलवे की ग्रुप डी की परीक्षा की तौयारी कर रहे थे। जब इतनी छोटी नौकरी की परीक्षा में भी दोनों पास नहीं कर पाये तो वे निराश हो गये। 2010 की बात है। एक दिन आदित्य ने सावन को दिल्ली चलने के लिए कहा।
Saturday, September 30, 2017
नारी को पूजने का सबसे अच्छा तरीका है, ये सुनिश्चित करना कि-
किसी दुर्गा का गर्भपात न हो,
कोई सरस्वती स्कूल जाने से वंचित न रह जाए,
किसी लक्ष्मी को आर्थिक विपन्नता से न गुजरना पड़े,
किसी काली का उसके रंग के कारण उपहास न हो,
कोई सीता पति द्वारा त्यागी न जाए,
कहीं पार्वती दहेज के लिए प्रताड़ित न हो,
दरअसल ये त्योहार इसीलिए मनाए जाते हैं कि हमें पता रहे कि हमारे अंदर का रावण एक बार में नहीं मर सकता। इसे मारते रहना पड़ता है...निरंतर...प्रति दिन...प्रति वर्ष।
वेश्यालय की मिट्टी से क्यों बनाई जाती है देवी प्रतिमा, जानिए इसकी पौराणिक मान्यता और महत्व

वेश्यालय की मिट्टी प्रयोग करने के पीछे की मान्यता


सामाजिक सुधार और सकारात्मक बदलाव का प्रतिक स्वरूप है ये लोकप्रथा

Friday, September 29, 2017
इस चित्र को गलत नजरिये से नही बलकि सही नजरिये से देखे .....
रावण बनना भी कहां आसान..
रावण में अहंकार था
तो पश्चाताप भी था
रावण में वासना थी
तो संयम भी था
रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी
तो बिना सहमति परस्त्री को स्पर्श भी न करने का संकल्प भी था
सीता जीवित मिली ये राम की ही ताकत थी
पर पवित्र मिली ये रावण की भी मर्यादा थी
राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था..
दस के दस चेहरे, सब "बाहर" रखता था...!!
महसूस किया है कभी
उस जलते हुए रावण का दुःख
जो सामने खड़ी भीड़ से
बारबार पूछ रहा था.....
Saturday, September 16, 2017
Why government is opposing to consider marital rape as crime?
केंद्र सरकार का मानना है कि महिला को अपने पति को ‘न’ कहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता. लिहाजा पत्नी के न कहने के बावजूद अगर उसका पति उसके साथ जबरदस्ती करता है तो उसे बलात्कार नहीं माना जाएगा. केंद्र सरकार के इस रुख से ‘वैवाहिक बलात्कार’ यानी ‘मैरिटल रेप’ एक बार फिर से देश भर में चर्चा का मुद्दा बन गया है. इस मुद्दे से जुड़े तमाम पहलुओं को समझने से पहले जानते हैं कि मैरिटल रेप क्या है और हमारे देश के मौजूदा कानून इस बारे में क्या कहते हैं.
Is there any definition of Marital rape in India?
मैरिटल रेप हमारे देश के कानूनों में कहीं भी परिभाषित नहीं है. दुनिया के जिन देशों में मैरिटल रेप को अपराध माना जाता है वहां इसका सीधा-सा मतलब है कि कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध या उसकी अनुमति के बिना, जबरन उससे शारीरिक संबंध नहीं बना सकता. और यदि कोई ऐसा करता है तो उसे बलात्कार का दोषी माना जाएगा.
लेकिन हमारे देश में ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 - जिसमें रेप यानी बलात्कार की परिभाषा दी गई है - उसमें एक अपवाद भी शामिल है. यह अपवाद कहता है कि अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम नहीं है तो उसके पति द्वारा उसके साथ बनाए गए किसी भी तरह के यौन संबंधों को बलात्कार नहीं माना जाएगा. यही अपवाद हमारे देश में मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी से बाहर कर देता है.
Conntrdiction in our laws
हमारे कानूनों में सिर्फ एक ही परिस्थिति में पत्नी के साथ जबरन बनाए गए संबंधों को अपराध माना गया है.
आईपीसी की धारा 376बी के अनुसार अगर कोई पत्नी अपने पति से अलग रहने लगी हो, तब उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाने पर पति को सजा हो सकती है. लेकिन इसे भी बलात्कार नहीं माना गया है और इस अपराध के लिए सजा भी बलात्कार की तुलना में काफी कम है.
इस प्रावधान के अनुसार दोषी को न्यूनतम दो साल और अधिकतम सात साल तक की सजा हो सकती है, जबकि बलात्कार के मामलों में न्यूनतम सजा ही सात साल और अधिकतम सजा उम्र कैद तक है.
इन्हीं विरोधाभासों के चलते दिल्ली उच्च न्यायालय में कुछ याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इन याचिकाओं में मांग की गई है कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित किया जाए और इसे उतना ही गंभीर माना जाए जितना कि बलात्कार को माना जाता है. इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा था. इस पर केंद्र ने शपथपत्र दाखिल करते हुए न्यायालय को बताया कि मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जा सकता. लेकिन इसके लिए केंद्र ने जो आधार बताए हैं, वे सही नहीं कहे जा सकते.
मैरिटल रेप पर केंद्र सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने मुख्यतः दो कारणों से मैरिटल रेप को अपराध मानने से इनकार किया है
ऐसा करने से ‘विवाह की संस्था अस्थिर’ हो सकती है. यह बिलकुल वैसा ही तर्क है जैसा कुछ दशक पहले हिंदू धार्मिक कानूनों में सुधार के दौरान दिया जाता था. इस्लाम या ईसाई धर्म की तरह हिंदू धर्म में शादी को कॉन्ट्रेक्ट नहीं माना गया है. हिंदू धर्म के अनुसार विवाह एक संस्कार है और यह जन्म-जमांतर का अटूट रिश्ता होता है. लिहाजा हिंदू धर्म में तलाक का कोई प्रावधान नहीं था. ऐसे में जब हिंदू धार्मिक कानूनों में सुधार होने लगे और तलाक का प्रावधान बनाया गया
इसके दुरुपयोग की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं. सरकार ने दहेज़ उत्पीड़न के लिए बने कानून और विशेष तौर से आईपीसी की धारा 498ए (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा उत्पीड़न किया जाना) का हवाला देते हुए कहा है कि मैरिटल रेप को अगर अपराध घोषित किया जाता है तो उसका दुरुपयोग भी 498ए की तरह होने लगेगा.
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि धारा 498ए का दुरुपयोग भी हुआ है. इसी कारण अब सर्वोच्च न्यायालय ने इस तरह के मामलों में पति और उसके रिश्तेदारों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के साथ ही यह भी निर्देश जारी कर दिए हैं कि इस धारा के तहत मामला दर्ज होने से पहले एक स्थानीय समिति मामले की जांच करेगी. ऐसा होने से 498ए के झूठे मामलों पर रोक भी लगी है और सच में पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने का विकल्प भी बना हुआ है. ऐसा ही मैरिटल रेप के मामले में भी हो सकता है.
कानून के जानकारों का मानना है कि दुरुपयोग का खतरा हर कानून में ही होता है. झूठे आरोप किसी भी अपराध के लगाए जा सकते हैं फिर चाहे वह चोरी हो, लूट हो या बलात्कार हो. इससे निपटने के लिए सरकार को अलग से व्यवस्थाएं मजबूत करनी चाहिए. लेकिन दुरुपयोग की संभावना के डर से कानून ही न बनाए जाने को कई जानकार बिलकुल गलत और अतार्किक मानते हैं. कुछ आंकड़ों के अनुसार देशभर में दस प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं वैवाहिक जीवन में यौन हिंसा और बलात्कार का शिकार होती हैं. यह अपने-आप में बहुत बड़ा आंकड़ा है. इसलिए कई जानकारों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि सिर्फ दुरुपयोग की संभावना के चलते मैरिटल रेप की असल पीड़ितों को बिना कोई कानूनी विकल्प दिए नहीं छोड़ा जा सकता.
मौजूदा कानून में यौन हिंसा से पीड़ित पत्नियों के पास क्या विकल्प हैं?
ऐसा नहीं है कि मौजूदा कानून में यौन हिंसा से पीड़ित पत्नियों के पास कोई विकल्प ही न हों. भले ही ये विकल्प उतने मजबूत नहीं हैं जितना कि मैरिटल रेप को अपराध मान लिए जाने से हो सकते हैं, लेकिन कुछ विकल्प आज भी महिलाओं के पास हैं. इनमें से एक विकल्प तो वही है जिस पर ऊपर भी हम चर्चा कर चुके हैं.
यदि कोई महिला अपने पति से अलग रहने लगे और तब उसका पति उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए तो वह महिला आईपीसी की धारा 376बी के तहत अपने पति पर मुकदमा कर सकती है. इस धारा के अंतर्गत दोषी को सात साल तक की सजा हो सकती है. लेकिन इस धारा के अंतर्गत वे महिलाएं न्याय नहीं मांग सकतीं जो अपने पति के साथ रहते हुए मैरिटल रपे की शिकार हो रही हों.
इसके अलावा महिलाओं के पास यह भी विकल्प है कि वे घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अपने पति के खिलाफ मामला दर्ज करवा सकती हैं. इस अधिनियम में जबरन बनाए गए यौन संबंधों को हिंसा की परिभाषा में शामिल किया गया है. लिहाजा ‘मैरिटल रेप’ से पीड़ित कोई भी महिला अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवा सकती है. लेकिन मैरिटल रेप को परिभाषित करने और अपराध घोषित करने की मांग करने वाले मानते हैं कि मौजूदा व्यवस्था में जो विकल्प हैं वे इस अपराध को उसकी गंभीरता से साथ दण्डित करने की बात नहीं करते. इन लोगों का मानना है कि मैरिटल रेप बलात्कार जितना ही जघन्य अपराध घोषित होना चाहिए.
कई मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि मैरिटल रेप बलात्कार से भी ज्यादा जघन्य अपराध है. इन लोगों के अनुसार मैरिटल रेप के पीड़ितों के साथ ये अपराध बार-बार दोहराया जाता है और उनके पास इससे बचने के कोई विकल्प नहीं होते. लिहाजा इस तरह के अपराध के पीड़ित पर गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं. लगभग ऐसा ही वर्मा समिति ने भी माना था और अपनी रिपोर्ट में मैरिटल रपे को अपराध घोषित करने के मांग की थी.
मैरिटल रेप पर वर्मा समिति की रिपोर्ट क्या कहती है?
2012 के कुख्यात निर्भया गैंगरेप मामले के बाद महिलाओं से जुड़े कानूनों में सुधार के लिए जस्टिस वर्मा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था. इस समिति की संस्तुतियों के आधार बलात्कार से जुड़े कई कानूनों में बदलाव भी किये गए. लेकिन वर्मा समिति की रिपोर्ट को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया था. वर्मा समिति का गठन 23 दिसंबर 2012 को किया गया था. इसके ठीक एक महीने बाद इस समिति ने लगभग साढ़े छह सौ पन्नों की अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. इस रिपोर्ट में पेज नंबर 113 से 118 तक मैरिटल रेप पर चर्चा की गई है.
जस्टिस वर्मा और उनके साथियों ने इस रिपोर्ट में कहा था कि ‘मैरिटल रेप का अपराध की श्रेणी से बाहर होना उस रुढ़िवादी मानसिकता को दर्शाता है जिसमें पत्नियों को पति की संपत्ति से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाता.’ रिपोर्ट में यूरोपियन मानवाधिकार आयोग के एक मामले का हवाला देते हुए लिखा है, ‘हम इस निष्कर्ष से सहमत हैं कि एक बलात्कारी, बलात्कारी ही होता है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका पीड़ित से क्या रिश्ता था.’
आगे इस रिपोर्ट में कहा गया था, ‘धारा 375 से मैरिटल रेप का अपवाद समाप्त किया जाए और कानून में यह स्पष्ट किया जाए कि पीड़ित का अपराधी से क्या रिश्ता है, कोई मायने नहीं रखता. बलात्कार के मामलों में यह अपराधी का पीड़ित का पति होना न तो कोई बचाव हो सकता है और ही सजा कम करने का कोई आधार.’ लिहाजा वर्मा समिति ने स्पष्ट कहा था कि एक पति अगर अपनी पत्नी की इच्छा के खिलाफ उसके साथ यौन संबंध बनाता है तो उसे बलात्कार का दोषी माना जाना चाहिए और इसकी सजा भी उतनी ही होनी चाहिए जितनी आम तौर पर बलात्कार के मामलों में होती है.
वर्मा समिति ने मैरिटल रेप को कानून में शामिल करने के संबंध में यह भी कहा था कि ऐसा करने के लिए पुलिस, अभियोजन और समाज को भी इस बारे में जागरूक करना जरूरी है. दक्षिण अफ्रीका का उदाहरण देते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया था कि वहां कानून बनने के बाद भी मैरिटल रेप के मामलों में ज्यादा कमी नहीं आई क्योंकि पुरानी मान्यताओं के चलते समाज में इस तरह के अपराध या तो स्वीकार्य थे या उन्हें उतना गंभीर नहीं माना जाता था. लिहाजा वर्मा समिति ने माना कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने के साथ ही इस पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाने भी जरूरी हैं.
वर्मा समिति की संस्तुतियों को तत्कालीन केंद्र सरकार ने जल्द ही कानून का रूप दे दिया था लेकिन समिति की सारी बातों को इसमें शामिल नहीं किया गया.
मैरिटल रेप पर समिति की संस्तुति को सरकार ने नकार दिया था और 375 में मौजूद अपवाद को लगभग वैसा ही बनाए रखा.
कई लोग यह भी सवाल करते हैं कि मैरिटल रेप को लागू करने पर इसके दुरुपयोग की संभावनाएं बहुत होंगी और इस बारे में वर्मा समिति ने भी कोई टिप्पणी नहीं की है. इस सवाल के जवाब में ‘ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन’ की सचिव कविता कृष्णन कहती हैं, ‘मैरिटल रेप का बहुत दुरुपयोग होगा, इससे विवाह की संस्था कमज़ोर हो जाएगी, लड़के शादी करने से डरने लगेंगे आदि, इस तरह की जितनी भी बातें कही जा रही हैं, वो सिर्फ इस मुद्दे को कमज़ोर करने के लिए हैं. पित्रसत्तात्मक व्यवस्था को जब भी चुनौती मिली है, ऐसी बातें कही ही गई हैं.’
#BeingWoman is 'Expectations'
TO HUSBANDS: Be satisfied with the vagina of your wife only.
Don't cheat your wife. THE PAIN you inflict on your wife by running after cheap ladies who destroy your important UNION TO YOUR BEAUTIFUL WIFE is horrible! Only one vagina is important. The rest you must run away from. Run away from vaginas I plead with you. HONOUR YOUR MARRIAGE! Stay away from chatting with women who want your time. LAUGH TOGETHER WITH YOUR WIFE AND ENJOY YOUR WIFE'S COMPANY!
I repeat run away from all vaginas. God's word says: "It is God's will that you should be sanctified: that you should avoid sexual immorality"(1 Thes 4:3). RUN FOR YOUR LIFE! Maintain your integrity. FIGHT TO STAY PURE! Write this down : a man who is not faithful with his penis will have a bad name for thousands of years. GUARD YOUR PENIS! It holds your integrity. YOUR RESPECT!
Love your wife alone and her alone all the days of your life. A POWERFUL MAN HONOURS HIS WIFE AND GIVES ALL HIS PENIS TO HER ALONE! I repeat for weak men, love only your wife and her vagina. RUN AWAY FROM VAGINAS if you want to have a good name! Run more than 700km an hour and run far way.
The NT bible says: "Run from sexual sin!"(1 Corinthians 6:18). My DB bible says: "Fly fornication". RUN TO the arms of your WIFE! Fly to the arms of your beautiful wife. Never find comfort in the bosom of women around you. RUN TO THE LOVE OF YOUR WIFE with excitement!
The one you said I do to before God is the beautiful one. SHE IS THE ONE GOD BLESSED WITH THE LOVE YOU NEED AS A HUSBAND! Think about her and your children. SHE IS YOUR WIFE! The most important person on earth. YOUR WIFE! Honour this simple lesson, next time when I meet you, I will talk more. WHY WILL I TALK MORE? Because I am looking for "faithful men".
YOU CANNOT TALK CERTAIN THINGS IF A PERSON IS NOT FAITHFUL. The bible says: "and what you have heard from me in the presence of many witnesses entrust to faithful men who will be able to teach others also"(2 Timothy 2:2).
Friday, September 15, 2017
Thank You MoM !
• PLEASE READ •
Your mom carried you in her
womb for nine months. She felt
sick for months with nausea, then
she watched her feet swell and
her skin stretch and tear. She
struggled to climb stairs. She got
breathless quickly. She suffered
many sleepless nights. She then
went through EXCRUCIATING PAIN
to bring you into this world. She
became your nurse, your chef,
your maid, your chauffeur, your
biggest fan, your teacher, and
your best friend. She's struggled
for you, cried over you, hoped the
best for you, and prayed for you.
Most of us take our mom for
granted. But there are people
who have lost or never even seen
theirs.
Thank you Mom!
Sunday, September 3, 2017
अब अपनी पत्नी का बलात्कार करने के 5 'सरकारी' कारण
Tuesday, August 22, 2017
लड़कियां जरा गौर करे....
👇
#स्त्रीयो को ऊपर वाले ने छठी इंद्री (six sense) सोचने समझने की क्षमता इतनी अधिक दी है की वो किसी भी पुरुष की नजरों से अपने बारे में उसकी नीयत(द्रष्टि) को जान लेती है।
#यहाँ तक की अगर कोई उसे छुप कर भी घूर रहा हो तो उसे एहसास हो जाता है की कोई उसे देख रहा है।
ईश्वर ने उसे ये शक्ति इसलिए दी है की वो जान सके की कौन उसके लिए अच्छा है और कौन बुरा।
#लेकिन ना जाने क्यों यही औरत, लड़की जब किसी पर विश्वास करती है तो उसकी छठी इंद्री की शक्ति कहाँ चली जाती है?
#जो चीज़ सब को नजर आ रही होती है वो उसकी आँखों से कैसे ओझल हो जाती है?
#और फिर कोई लाख उसे समझाए लेकिन उस की अक़्ल पर ऐसा पत्थर पड़ता है की उसकी सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है।
#उसे पैदा करने वाले माँ बाप, उसकी खुशियों का ख्याल रखने वाले भाई-बहन, अच्छा बुरा समझाने वाली सहेलियां और रिश्तेदार सब लोग उसे दुश्मन लगने लग जाते हैं और सिर्फ एक शख्स जो दिल में इरादा लिए हुए उसकी तरफ बढ़ रहा होता है वो उसे सच्चा लागता है।
#वो ये नही सोचती की इतने सारे लोग कैसे गलत हो सकते है और जो सारी दुनिया से छुप कर मुझसे सम्बन्ध रखना चाहता है वो कैसे अच्छा व्यक्ति हो सकता है?
#फिर आखिर एक दिन पछतावा उसका मुकद्दर बनता है उसकी जिंदगी का एक हिस्सा बनता है !!
#सुनो....
#माँ बाप गलत फैसला तो कर सकते है लेकिन कभी गलत नही हो सकते।
वो हमेशा अपनी औलाद की भलाई ही चाहते है।
उन्हें कभी अपना दुश्मन न समझें।
#अपने आपको अक़्ल मंद समझ कर अपनी दुनिया और अपनी आबरू, अपने भविष्य को बर्बाद मत करो।
समझदारी सारी उम्र के पछतावे से बचा सकती है।
#याद रखें जो आपको हासिल करने की जिद में आज आपकी इज्जत की परवाह नही कर रहा,
वो बाद में भी इज्जत नही दे सकता.....
Monday, August 21, 2017
Friday, August 18, 2017
बेटियां
घर की राज़दार होती है बेटियां,
बचपन हैं बेटियां, जवानी हैं बेटियां,
सत्यम शिवम सुंदरम सी होती हैं बेटियां,
फिर क्यों जला देते हैं ससुराल में बेटियां,
फिर क्यों ना बांटे खुशियाँ जब होती हैं बेटियां,
एक नहीं दो वंश चलाती हैं बेटियां,
फिर गर्भ में क्यों मार दी जाती हैं बेटियां?
दिल छू लेगी ये कविता एक बार जरूर पढें...........
हँसी ख़ुशी सब काम हुआ था,सारी रस्म अदाई का ।.
बेटी के उस कातर स्वर ने,बाबुल को झकझोर दिया ।।
पूछ रही थी पापा तुमने,क्या सचमुच में छोड़ दिया ।।
मेरे रोने को पल भर भी ,बिल्कुल नहीं सहा तुमने ।।
क्या इस आँगन के कोने में,मेरा कुछ स्थान नहीं ।।
अब मेरे रोने का पापा,तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं ।।
आकर के पापा क्यों इनको,आप नहीं धमकाते हैं।।
नहीं रोकते चाचा ताऊ,भैया से भी आस नहीं।।
ऐसी भी क्या निष्ठुरता है,कोई आता पास नहीं।।
उमड़ पड़े आँखों से आँसू,बदहवास सा दौड़ पड़ा ।।
कातर बछिया सी वह बेटी,लिपट पिता से रोती थी ।।
जैसे यादों के अक्षर वह,अश्रु बिंदु से धोती थी ।।
माँ को लगा गोद से कोई,मानो सब कुछ छीन चला।।
छोटा भाई भी कोने में,बैठा बैठा सुबक रहा ।।
उसको कौन करेगा चुप अब,वह कोने में दुबक रहा।।
बेटी के जाने पर, घर ने जाने क्या क्या खोया है।।
कभी न रोने वाला बापू,फूट फूट कर रोया है.!!







